
Sachin Khatri
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- शंखनाद से जागा रणSachin Khatri·शंखनाद से जागा रण
- न विजय चाहिए, न राज्यSachin Khatri·न विजय चाहिए, न राज्य
- राज्य के लोभ मेंSachin Khatri·राज्य के लोभ में
- गांडीव ने ली पुकारSachin Khatri·गांडीव ने ली पुकार
- रण के प्रहरीSachin Khatri·रण के प्रहरी
- कुल का दीप न बुझने दोSachin Khatri·कुल का दीप न बुझने दो
- रथ को मध्य में ले चलोSachin Khatri·रथ को मध्य में ले चलो
- गांडीव रख दियाSachin Khatri·गांडीव रख दिया
- अपने सामने अपने खड़ेSachin Khatri·अपने सामने अपने खड़े
- धर्मक्षेत्र की पहली पुकारSachin Khatri·धर्मक्षेत्र की पहली पुकार